Friday, 12 September 2025

हर एक शाम में गूंजे तुम्हारी हँसी

हर एक शाम में गूंजे तुम्हारी हँसी,

जैसे खुशबू से महके तुम्हारी हँसी।


कभी बादल, कभी सूरज, कभी चाँद-सी,

हर अदा में है बदली तुम्हारी हँसी।


नीर सी, शांत सी, फिर भी मचलती हुई,

दिल के सागर में उतरे तुम्हारी हँसी।


रूह तक भीग जाए वो खनकती हवा,

जब भी कानों में पहुंचे तुम्हारी हँसी।


जैसे बच्चों की किलकारी सुबह-सवेरे,

ज़िंदगी को ही छू ले तुम्हारी हँसी।


हर ग़मों को भुला दे वो एक पल में ही,

इतनी प्यारी लगे क्यों तुम्हारी हँसी?


मैं तो हर बार इसी में फँसा रह गया,

एक जादू-सा कर दे तुम्हारी हँसी।

©®मधुमिता

बावरी के नाम

छू गई दिल की हर इक तार तू बावरी,

ख़्वाब में आई जैसे बहार तू बावरी।


तेरी बातों में है कोई जादू सा असर,

हँस के कह दे जो कोई बात तू बावरी।


पाँव में पायलें, आँखों में शोख़ियाँ,

रंग बिखेरे सजी हर बात तू बावरी।


जैसे बरखा में भीगता चाँद हो कोई,

भीगी-भीगी सी वो बरसात तू बावरी।


धड़कनों में बसी है तू, साँसों में घुली,

दिल की गहराइयों की बात तू बावरी।


तेरे होने से रोशन हैं वीरानियाँ,

रूह की सबसे मीठी ज़ात तू बावरी।


©®मधुमिता


ख़ुद को तुझमें ही पाता हूँ हर बार मैं,

आइना देखूँ, लगे साथ तू बावरी।

तुम्हारी हँसी

 ❖ मतला:


ज़माने से छुपी एक रूहानी कहानी — तुम्हारी हँसी

हर एक दर्द पे जैसे हो मरहम रवानी — तुम्हारी हँसी


❖अशआर:


सहर की तरह खिलती है हर सुबह में

गुलों पर उतरती है झीलों की रानी — तुम्हारी हँसी


न जाने कहाँ से उतरती है चुपके

सदा बन के आती है कोई निशानी — तुम्हारी हँसी


तुम्हारे लबों की वो मीठी खनक है

सुरों में बसी इक नई इक कहानी — तुम्हारी हँसी


©®मधुमिता

Sunday, 23 March 2025

होली है

 होली है भई होली है,

रंग रंगीली टोली है,

रंगो भरी हर झोली है,

होली है भई होली है।


सिंदूरी सा लाल है,

गुलाबी हुआ गाल है,

पीले-नीले का भी धमाल है,

चहुं ओर प्रेम प्रीत का गुलाल है।


मीठी मीठी गुजिया है,

भीगी गुङिया की चुटिया है,

थमती नही पिचकारी की धार है,

ठंडाई और पकवानों की भरमार है।


चाचा ने रंगा,तो चाची मुस्काई,

भैया के छुवन से भाभी शरमाई,

नज़र से नज़र टकराई,

फिर बनने को लो नई कहानी अाई।


मीठी मीठी सबकी बोली,

मानो रब ने मिसरी सी घोली,

हरकोई बना है हमजोली,

होली तो भई ,हम सबकी होली।


भूलो सब शिकवे शिकायत,

सब पर करो हर इनायत ,

बिखराओ हर ओर मुहब्बत,

गले लगो सब,छोङो ये हिचकिचाहट।


रास रंग का ये त्योहार,

स्वागत करो बारम्बार,

गल बहियों का डारे हार,

खोलो अपने मन के द्वार।


खुशियों के मोती लुटाओ,

अबीर और गुलाल उङाओ,

दुनिया को रंगीन बनाओ,

दिलों को सबके करीब लाओ।


होली है भई होली है,

रंग रंगीली टोली है,

रंगो भरी हर झोली है,

होली है भई होली है ।।


©®मधुमिता  


#Hindi #hindipoem #hindipoetry #hindipoet #hindiwriter

Sunday, 21 April 2024

ज़िन्दगी

हरी इलायची सी 

तीक्ष्णगंधा 

काली मिर्च जैसी उत्तेजक
दालचीनी सी मीठी
जायफल सी अनूठी
लवंग सम तीखी 
तेजपत्ते सी हल्की तिक्त
पर थोड़ी सी मंद 
अजवाईन सी तेज़ 
जवित्री सी गहरी
सौंफ सी सौम्य 
असरदार और शीतल
कितने स्वादों की संदूकड़ी तू ज़िन्दगी 
क्यों है इतनी स्वादु तू ज़िन्दगी ! 


©®मधुमिता


 #ज़िन्दगी5 

Friday, 26 May 2023

ज़िन्दगी (4)

 

ऐ ज़िन्दगी
तेरे कितने रंग
कितने ढंग
हर रंग में रंग जाने को
जी चाहता है
हर ढंग अपनाने को
ये दिल मचलता है
चल बन जाती हूँ मैं भी
तुझ सी
ऐ ज़िन्दगी!

©®मधुमिता

#ज़िन्दगी4 

Wednesday, 3 May 2023

ज़िन्दगी(3)

सुर्ख़ गर्म अंगारों सी 


कभी बर्फीली बौछारों सी


मसाला-नींबू के चटखारों सी


भरी बरसात में


धीमी आँच पर भुनती


सुनहरे भुट्टे की ख़ुश्बू सी 


सोंधी-सोंधी सी ज़िन्दगी!


©®मधुमिता

#ज़िन्दगी3