Monday, 5 January 2026

असीम..

 मुझे ले चलो वहाँ

जहाँ तुम्हारा नाम

मेरी हर साँस में

पहली धड़कन बनकर उभरे।


सात समुंदर भी कम पड़ें

अगर तुम्हारी आँखों की गहराई नापनी हो,

तेरह नदियाँ भी थक जाएँ

अगर तुम्हारे स्पर्श तक पहुँचना हो।


नीले आकाश के नीचे

मैं अपने सारे डर उतार दूँ,

और तुम अपने कंधों पर

मेरा भरोसा पहन लो।


वहाँ ना कोई आईना होगा,

न कोई सवाल,

बस तुम्हारी हथेलियों में

मेरा पूरा भविष्य सिमटा होगा।


मैं तुम्हें यूँ चाहूँ

जैसे धरती बारिश को,

और तुम मुझे यूँ अपनाओ

जैसे रात चाँद को,

बिना शर्त,

बिना सीमा।


©®मधुमिता

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