तुम्हारे पास आने में
किसी रास्ते की ज़रूरत नहीं,
तुम्हारी ख़ामोशी ही
मुझे बुला लेती है।
जब तुम पास होते हो
तो शब्द थक जाते हैं,
और मेरी साँसें
तुम्हारी लय सीख लेती हैं।
मैं तुम्हें छूती नहीं,
फिर भी
तुम मेरी धड़कनों में
पूरा उतर आते हो।
तुम्हारी आँखों में
मैं अपने अधूरेपन को
बिना झिझक छोड़ सकती हूँ,
मुझे कोई डर नही,
जैसे रात को
चाँद से डर नहीं लगता।
अगर कभी खो जाऊँ
तो मुझे आवाज़ मत देना,
बस पास बैठ जाना,
मैं तुम्हें
ख़ुद ढूँढ लूँगी।
©®मधुमिता
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