तुम्हारी दृष्टि की छाया में
मेरा हर पल सिहर जाता है,
तुम्हारी मौन मुस्कान से
हृदय का साज बज जाता है।
केशों से फिसलती चाँदनी
जब गालों को छू जाती है,
हर साँस मेरी अनजाने में
बस तुम्हें ही गुनगुनाती है।
पलकों के झुकते ही जैसे
सपनों का सावन छा जाए,
और अधरों की हल्की लाली
मन में बिजली-सी समा जाए।
निकट तुम्हारे होने भर से
सारी दुनिया धुँधली लगे,
दो धड़कनों के संगम में
हर दूरी पिघलती लगे।
©®मधुमिता
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